जब हौसले बुलंद हों और कुछ करने का जज्बा हो, तो मुश्किलें खुद-ब-खुद रास्ता छोड़ देती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सरायकेला-खरसावां जिले के रसुनिया पंचायत के एक शिक्षित युवा खिरोद महतो ने। सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बार-बार होने वाले ‘पेपर लीक’ से तंग आकर खिरोद ने हार नहीं मानी, बल्कि स्वरोजगार को अपना हथियार बनाया। आज वह न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि चार अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।
जब पेपर लीक ने तोड़ा सपना, तो चुना आत्मनिर्भरता का रास्ता
माझीडीह निवासी बद्धनाथ महतो के पुत्र खिरोद महतो स्नातक पास हैं। खिरोद बताते हैं:
“मैंने कई बार सरकारी नौकरी के लिए कड़ी मेहनत कर परीक्षाएं दीं, लेकिन हर बार पेपर लीक की वजह से परिणाम टल गए या परीक्षा रद्द हो गई। इसके बाद मैंने तय किया कि नौकरी के पीछे भागने के बजाय अपनी पूर्वजों की जमीन पर ही कुछ बड़ा करूंगा।”
KCC लोन से बदली किस्मत: बागवानी और पोल्ट्री का शानदार मॉडल
अक्टूबर 2022 में खिरोद ने बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड लोन लिया और अपने विजन को जमीन पर उतारा। आज उनके फार्म हाउस की खासियतें देखने लायक हैं:
- उन्होंने अपने खेत में केसर, दशहरी, आम्रपाली और मालदा जैसी प्रीमियम किस्मों के आम के पौधे लगाए हैं। इसके अलावा नींबू, अमरूद और पपीते की भी बंपर पैदावार हो रही है।
- बागवानी के साथ-साथ खिरोद एक बड़ा पोल्ट्री फार्म भी चलाते हैं, जहां गर्मी के सीजन में एक बार में 3,000 से 5,000 चूजे पाले जाते हैं।
खिरोद अपने उत्पादों को बेचने के लिए किसी बिचौलिए पर निर्भर नहीं हैं। वे खुद अपने फार्म के ताजे फल और पोल्ट्री उत्पादों को चांडिल स्टेशन, चांडिल बाजार और स्थानीय हाट-बाजारों में सप्लाई करते हैं, जिससे उन्हें सीधा और मोटा मुनाफा मिलता है।
यह इलाका जंगली हाथियों के गलियारे में आता है, जहां हर साल हाथी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इस बड़े जोखिम के बावजूद खिरोद पीछे नहीं हटे। हाथियों से सुरक्षा के लिए अब वे अपने पूरे फार्म हाउस के चारों ओर सोलर फेंसिंग लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
खिरोद की यह सफलता अब इलाके के दूसरे बेरोजगार युवाओं के लिए मिसाल बन चुकी है। जिला कृषि विभाग ने भी खिरोद के इस हाइब्रिड फार्मिंग मॉडल की सराहना की है। विभाग अब अन्य किसानों और युवाओं को ट्रेनिंग दिलाने के लिए खिरोद के फार्म पर भेजने की योजना बना रहा है। खिरोद का मानना है कि अगर सरकार युवाओं को ऐसी योजनाओं में थोड़ी और मदद दे, तो झारखंड से युवाओं का पलायन पूरी तरह रुक सकता है।
