झारखंड में भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में अधिकारियों को सड़क, सार्वजनिक स्थलों और जरूरत वाले इलाकों में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड स्थित आदिवासी बहुल झरना गांव में करीब 40 परिवार आज भी भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गांव में न तो कोई चालू चापाकल है और न ही स्थायी जलापूर्ति की व्यवस्था। करीब 250 से 300 ग्रामीणों को रोजाना तीन किलोमीटर दूर जंगल और पहाड़ी रास्तों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में यह समस्या लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।
जंगल के डाडी के भरोसे गांव की प्यास
गांव के चारों ओर फैले जंगलों के बीच स्थित एक डाडी (कुआंनुमा जलस्रोत) का पानी ही ग्रामीणों का सहारा बना हुआ है। स्थानीय महिलाओं हेमंती हांसदा, शांति मुर्मू और बिनीता ने बताया कि तेज धूप में सिर पर मटका रखकर पहाड़ी रास्तों से पानी लाना बेहद मुश्किल होता है। कई बार फिसलन भरे रास्तों पर गिरने का खतरा भी बना रहता है, लेकिन मजबूरी में यही करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में पानी खत्म हो जाए तो जंगल जाने में डर लगता है, फिर भी परिवार की जरूरत के लिए जाना पड़ता है। महिलाओं को स्नान और पानी भरने के लिए दूर जंगल तक जाना पड़ता है, जिससे सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती है।

नल-जल योजना अधूरी, बोरिंग भी फेल
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में एक भी कार्यरत चापाकल नहीं है। करीब पांच वर्ष पहले यहां बोरिंग कराई गई थी, लेकिन 300 फीट खुदाई के बाद भी पानी नहीं निकला। इसके बाद कोई नई पहल नहीं हुई। पंचायत प्रतिनिधियों ने कई बार विभाग को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला। पंचायत समिति सदस्य सत्यनारायण महतो ने कहा कि पास के डाडी से पाइपलाइन के जरिए गांव तक पानी पहुंचाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए विभागीय पहल जरूरी है। वहीं पीएचडी विभाग के जेई जयप्रकाश यादव ने माना कि पहले की बोरिंग विफल रही थी और अब इस मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है।

सामाजिक जीवन पर भी असर
ग्रामीण अर्जुन मांझी और रामु मुर्मू का कहना है कि पानी की समस्या अब गांव के सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रही है। शादी-विवाह जैसे अवसरों पर बाहर से आने वाले लोग जब गांव की स्थिति देखते हैं तो रिश्ते तक ठुकरा देते हैं। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि भीषण गर्मी के इस दौर में जल्द स्थायी समाधान निकालकर गांव को पेयजल संकट से राहत दिलाई जाए।
