आधुनिक दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। दफ्तर के कामकाज से लेकर निजी जिंदगी की उलझनों तक, लोग अब हर मोड़ पर एआई टूल्स की मदद ले रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एआई धीरे-धीरे आपको असल दुनिया से काटकर अकेला बना रहा है?
हाल ही में सामने आई कुछ चौंकाने वाली रिसर्च और स्टडीज ने एआई के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले साइकोलॉजिकल (मानसिक) और सोशल (सामाजिक) खतरों को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है।
IIM लखनऊ की स्टडी: एआई से ‘इमोशनल अटैचमेंट’ पड़ रहा है भारी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) लखनऊ की एक ताजा स्टडी के मुताबिक, लोग अब एआई कंपैनियन (AI Companions) से हद से ज्यादा भावनात्मक रूप से जुड़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में इन टूल्स को ‘कंफर्ट और साथी’ के रूप में प्रमोट किया जा रहा है, जिससे प्रभावित होकर लोग इंसानों के बजाय एआई से इमोशनल सपोर्ट मांग रहे हैं।
एआई से लगाव इस कदर बढ़ चुका है कि हाल ही में एक महिला ने एक वर्चुअल (AI) पार्टनर से बाकायदा शादी तक रचा ली। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्भरता लंबे समय में असल जिंदगी के रिश्तों को पूरी तरह खत्म कर सकती है।
सिर्फ 10 मिनट का यूज भी दिमाग के लिए ‘जहर’
इसके अलावा कैरनेगी मेलन यूनिवर्सिटी (Carnegie Mellon University), एमआईटी (MIT), ऑक्सफोर्ड और यूसीएलए (UCLA) की एक संयुक्त रिसर्च में और भी डरावना सच सामने आया है। रिसर्च के मुताबिक:
- सोचने की क्षमता हो रही है खत्म: महज कुछ मिनट एआई चैटबॉट्स का इस्तेमाल करने से इंसान मानसिक रूप से आलसी हो रहा है।
- जल्दी हार मान रहे हैं लोग: जो लोग एआई का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, वे किसी मुश्किल समस्या के आने पर खुद दिमाग लगाने के बजाय तुरंत हार मान लेते हैं।
- समस्या सुलझाने का संघर्ष खत्म: एआई से तुरंत रेडीमेड जवाब मिलने की आदत के कारण इंसानी दिमाग मुश्किलों का हल ढूंढने का अपना स्वाभाविक हुनर खो रहा है।
तकनीक की इस लत से संभलना जरूरी
जानकारों का मानना है कि एआई टूल्स का इस्तेमाल केवल एक सहायक (Assistant) के रूप में होना चाहिए, न कि किसी दोस्त या लाइफ पार्टनर की जगह। अगर समय रहते इसके इस्तेमाल को सीमित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ी मानसिक अवसाद (Depression) और अकेलेपन का बुरी तरह शिकार हो सकती है।
