लौहनगरी इन दिनों पूरी तरह से राजस्थानी संस्कृति के रंग में सराबोर नजर आ रही है। बिस्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में आयोजित ‘राजस्थान महोत्सव’ ने शहरवासियों को सीधे मरुधरा की समृद्ध धरती और जीवंत लोकजीवन का अहसास करा दिया है। पारंपरिक कला, संगीत और लजीज खान-पान के इस अनूठे संगम को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है।
प्रवेश करते ही राजस्थान की गलियों का अहसास
पूर्वी सिंहभूम जिला मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा आयोजित इस भव्य महोत्सव में प्रवेश करते ही आगंतुक एक अलग दुनिया में पहुंच जाते हैं। पूरे परिसर को राजस्थानी कलाकृतियों और पारंपरिक सजावट से जीवंत किया गया है। हवाओं में गूंजते राजस्थानी लोकगीत और लोकनृत्य के सुरों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया है।
महोत्सव में बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए सबसे बड़ा रोमांच ऊंट की सवारी रहा। वहीं, राजस्थान के ग्रामीण परिवेश को दर्शाने वाले ‘चोखी ढाणी’ थीम आधारित विशेष जोन में लोगों ने पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
इसके अलावा, मनोरंजन के पुराने साधनों को समेटे बाइस्कॉप , सजीव कठपुतली नृत्य और विशेष कला प्रदर्शनियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवाओं और परिवारों के लिए परिसर में बनाए गए खास सेल्फी प्वाइंट्स आकर्षण का केंद्र रहे, जहां लोग इन यादों को कैमरों में कैद करते दिखे।
आयोजनकर्ताओं के मुताबिक, इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य आधुनिक दौर की नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और समृद्ध विरासत से रूबरू कराना है। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो किसी कारणवश राजस्थान नहीं जा पा रहे हैं, वे जमशेदपुर में ही रहकर वहां की संस्कृति को करीब से महसूस कर सकें।
महोत्सव में पहुंचे शहरवासियों ने इस पहल की जमकर तारीफ की। लोगों का कहना है कि औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में बैठकर राजस्थान की ऐसी भव्य और सजीव झलक मिलना एक दुर्लभ और सुखद अनुभव है, जो शहर की सांस्कृतिक विविधता में चार चांद लगाता है।
