कथित टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के लिए गुरुवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने और आदेश की कॉपी अपलोड होने के बाद उन्हें राजधानी की होटवार जेल (बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार) से रिहा कर दिया गया है। आलमगीर आलम के साथ उनके निजी सहायक संजीव लाल को भी करीब दो साल बाद जेल से रिहाई मिली है।
गुरुवार को रिहाई के वक्त आलमगीर आलम की पत्नी निशात आलम खुद होटवार जेल पहुंची थीं। समर्थकों की भीड़ और सुरक्षा के बीच पूर्व मंत्री जेल परिसर से बाहर निकले। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ही उनकी जमानत मंजूर कर ली थी, लेकिन तकनीकी कारणों और आदेश की कॉपी समय पर उपलब्ध न होने के कारण रिहाई में तीन दिन का विलंब हुआ।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी आलमगीर आलम ने पहले झारखंड हाई कोर्ट में जमानत की गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूर्व मंत्री को जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया।
बचाव पक्ष के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य रूप से तीन बिंदु रखे:
- जांच के दौरान आलमगीर आलम के खिलाफ कोई सीधा या प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला है।
- उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री या नगदी बरामद नहीं हुई थी।
- पूर्व मंत्री कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और जेल में उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी।
हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आलमगीर आलम का नाम टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और उससे जुड़े धनशोधन मामले में सामने आया था। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें अपनी मंत्री पद की कुर्सी भी गंवानी पड़ी थी।
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