NEET-UG 2026 रद्द: कोटा में फूटा छात्रों का गुस्सा, बोले- ‘हर परिवार दोबारा तैयारी का खर्च नहीं उठा सकता’

नीट परीक्षा का रद्द होना लाखों युवाओं के सपनों और उनके परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा मुद्दा है।

Johar News Times
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मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 रद्द होने के फैसले ने देश की कोचिंग नगरी कोटा में हलचल मचा दी है। महीनों की कड़ी मेहनत और लाखों रुपये निवेश करने के बाद परीक्षा रद्द होने से छात्रों में भारी नाराजगी और भविष्य को लेकर गहरा असमंजस है। छात्रों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का रद्द होना नहीं, बल्कि उनकी मानसिक और आर्थिक कमर तोड़ने जैसा है।

आर्थिक और मानसिक बोझ से दबे छात्र

कोटा में रह रहे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का तर्क है कि दोबारा परीक्षा आयोजित करना धरातल पर बेहद चुनौतीपूर्ण है:

  • बढ़ता खर्च: छात्रों के अनुसार, कोटा में कोचिंग फीस, हॉस्टल किराया और भोजन का खर्च पहले ही मध्यमवर्गीय परिवारों पर बड़ा बोझ है। कई अभिभावक कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, ऐसे में दोबारा महीनों का खर्च उठाना सबके लिए संभव नहीं है।
  • मानसिक दबाव: परीक्षा रद्द होने और दोबारा तैयारी करने के अनिश्चित माहौल से छात्रों का मनोबल टूट रहा है। विशेषज्ञों और छात्रों ने चिंता जताई है कि बढ़ता मानसिक दबाव छात्रों को गंभीर कदम उठाने पर मजबूर कर सकता है।
  • मेहनत पर पानी: छात्रों का कहना है कि उन्होंने साल भर जी-तोड़ मेहनत की थी, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं ने मेहनती विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में डाल दिया है।

सिस्टम पर उठे सवाल: ‘JEE की तरह ऑनलाइन हो परीक्षा’

छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. ऑनलाइन मोड: पेपर लीक की गुंजाइश खत्म करने के लिए नीट को भी JEE की तरह ऑनलाइन आयोजित किया जाए।
  2. जवाबदेही तय हो: कड़ी सुरक्षा के दावों के बावजूद पेपर लीक होना सिस्टम की बड़ी लापरवाही है। इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
  3. पारदर्शिता और सुरक्षा: कथित गेस पेपर के सवाल असली पेपर से मिलना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। छात्रों की मांग है कि दोबारा होने वाली परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।

कटऑफ और पेपर के स्तर का डर

री-एग्जाम की घोषणा के बाद छात्रों के बीच एक बड़ा डर पेपर के स्तर को लेकर भी है। छात्रों का मानना है कि:

  • यदि दोबारा होने वाला पेपर अधिक कठिन या लंबा आता है, तो कटऑफ (Cut-off) में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
  • परीक्षा केंद्रों पर सख्ती के बावजूद सिस्टम में सेंधमारी ने छात्रों का भरोसा पूरी तरह तोड़ दिया है।

नीट परीक्षा का रद्द होना लाखों युवाओं के सपनों और उनके परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा मुद्दा है। अब छात्रों की नजरें सरकार और एनटीए के अगले कदम पर टिकी हैं, ताकि भविष्य में उनकी मेहनत किसी लापरवाही की भेंट न चढ़े।

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