जमशेदपुर: यूपी संघ में पौने 8 करोड़ की जमीन खरीद में बड़ा गोलमाल, तीन पूर्व पदाधिकारियों की सदस्यता पर खतरा

यूपी संघ में पौने 8 करोड़ का जमीन घोटाला: रसूखदारों पर गिरी गाज, सदस्यता खतरे में!

Johar News Times
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उत्तर प्रदेश संघ में पौने 8 करोड़ रुपये की जमीन की खरीद में एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल के गौरी गांव में करीब साढ़े चार एकड़ जमीन की खरीद में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। छह साल बीत जाने के बाद भी इस जमीन की पूरी तरह से घेराबंदी नहीं हो सकी है, जिसके बाद संघ द्वारा कराई गई दो अलग-अलग जांचों में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

इस मामले में उत्तर प्रदेश संघ के वर्तमान महासचिव डॉ. डीपी शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष विजय सिंह राणा और पूर्व कोषाध्यक्ष देवेश अवस्थी को दोषी पाया गया है। संघ के संविधान के मुताबिक, निकट भविष्य में इन तीनों की सदस्यता रद्द हो सकती है। बता दें कि राणा पूर्व में टाटा स्टील के एमडी के पीए थे, जबकि शुक्ला वर्कर्स कॉलेज के प्राचार्य रह चुके हैं।

दो उच्चस्तरीय जांच समितियों ने खोली पोल

जमीन विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश संघ ने दो बार आंतरिक जांच कराई। पहली जांच कार्यकारिणी समिति ने अपने स्तर पर की। इसके बाद वार्षिक आमसभा में सर्वसम्मति से टाटा स्टील के पूर्व चीफ अधिकारी अनुराग अग्निहोत्री के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। इस समिति में जेबी सिंह, ऐंजिल उपाध्याय, अश्विनी कुमार सिंह, कमलेन्दु शुक्ला, प्रताप भानु सिंह और एचसी तिवारी शामिल थे। जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, जमीन खरीद में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव था और नियम-कानूनों को ताक पर रखा गया।

जमीन खरीद में हुईं ये बड़ी गड़बड़ियाँ:

जांच रिपोर्ट में जमीन की रजिस्ट्री और मालिकाना हक को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं:

  • 1964 के भू-सर्वे खतियान में खाता संख्या 34 और 131 की यह जमीन रैयत मोहन सिंह सरदार के नाम दर्ज है। खाता संख्या 125 भी उन्हीं के नाम है। नियमतः आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को नहीं बेची जा सकती।
  • गांव के ही एक सामान्य जाति के व्यक्ति जगरूप सिंह ने सरायकेला न्यायालय के एक तथाकथित आदेश के आधार पर जमीन को गैर-आदिवासी के नाम हस्तांतरित होने का दावा किया था और इसे 2011 में उद्यमी अतुल टॉक व अनहिता टॉक को बेच दिया। 2020 में यूपी संघ ने इसे खरीदा, लेकिन रजिस्ट्री या म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के आदेश में उस न्यायिक आदेश की कोई प्रति संलग्न नहीं है। दोषी पदाधिकारियों ने भी माना कि उनके पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है।
  • वर्तमान कार्यकारिणी ने विवाद के चलते निवेश पर रोक लगा रखी थी। इसके बावजूद महासचिव डॉ. डीपी शुक्ला ने पूर्व अध्यक्ष विजय सिंह राणा को पत्र लिखकर बिना किसी खुली निविदा के चहारदीवारी बनाने का आदेश दे दिया। दोनों ने मिलकर एक अलग ‘उत्तर प्रदेश संघ ट्रस्ट’ भी बना लिया है, जिसकी प्रासंगिकता पर जांच समिति ने सवाल उठाए हैं।
  • जमीन खरीद के बाद जब मूल रैयत के वंशज हाईकोर्ट गए, तो डॉ. डीपी शुक्ला ने संघ की ओर से उनके साथ गुपचुप सुलहनामा कर लिया। इसके तहत उन्हें प्रति डिसमिल अतिरिक्त राशि देने और स्कूल बनने पर नौकरी देने का वादा किया गया, जिससे संघ पर ₹2 करोड़ का और अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

विक्रेता अतुल और अनहिता टॉक को भेजा जाएगा नोटिस

साल 2023 में अखिलेश दुबे के नेतृत्व में आई नई कार्यकारिणी ने जब इस मामले की जांच शुरू की, तो जमीन विक्रेता अतुल टॉक और अनहिता टॉक ने पूर्व पदाधिकारियों (राणा और शुक्ला) के बिना मिलने से मना कर दिया। अब यूपी संघ इस मामले में दोनों विक्रेताओं को विधि सम्मत नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है, ताकि वे वह न्यायिक आदेश पेश करें जिसके तहत आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासी घोषित किया गया था।

क्या कहते हैं अध्यक्ष? “उत्तर प्रदेश संघ की आमसभा में सबकी सहमति से जांच समिति का गठन किया गया था। जांच समिति की रिपोर्ट मिल चुकी है और कार्यकारिणी इसका अध्ययन कर रही है। इसमें कुछ लोगों को संस्था के संविधान के विपरीत कार्य करने का दोषी माना गया है। फिलहाल इससे अधिक कुछ कहना उचित नहीं होगा।” — अखिलेश दुबे, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संघ

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