जमशेदपुर: टाटा लीज नवीकरण (Lease Renewal) के बहुप्रतीक्षित मामले में झारखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य सरकार अब लीज नवीकरण से पहले राजस्व की पाई-पाई का हिसाब करने की तैयारी में है। इसके तहत दिसंबर 2025 तक के रेंट सेस (किराया उपकर) का नए सिरे से आकलन (Re-assessment) किया जाएगा।
विभागों से मांगा गया ताजा ब्यौरा
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर ताजा आकलन रिपोर्ट मांगी है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य लीज नवीकरण से पहले बकाया राशि और भविष्य की देय राशि का सटीक निर्धारण करना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि राजस्व की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो।
पारदर्शिता और सही राजस्व पर जोर
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से पूरी प्रक्रिया में निम्नलिखित लाभ होंगे:
- पारदर्शिता: नए आकलन से लीज की शर्तों और वित्तीय लेनदेन में स्पष्टता आएगी।
- राजस्व की सुरक्षा: सरकार को देय उचित राजस्व प्राप्त हो सकेगा, जिससे राज्य के खजाने को मजबूती मिलेगी।
- प्रक्रिया में तेजी: बकाया राशि का निर्धारण होते ही लीज नवीकरण की अगली कड़ियाँ तेजी से जुड़ेंगी।
“सरकार लीज नवीकरण से पहले राजस्व की वास्तविक स्थिति जानना चाहती है। ताजा आकलन के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और शर्तों का निर्धारण किया जाएगा।”
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