ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध और इसके चलते पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट का सीधा असर अब आम भारतीय की जेब पर दिखने लगा है। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद देश में पेट्रोल, डीजल, घरेलू एलपीजी और सीएनजी के दामों में आग लग गई है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है।
पेट्रोल-डीजल में 4 साल बाद आया बड़ा उछाल
पिछले करीब चार सालों तक स्थिर रहने के बाद, मई 2026 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक चार चरणों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इस वैश्विक संकट के कारण अब तक दोनों ईंधन करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं, जिससे मालभाड़ा और परिवहन लागत में भारी इजाफा हुआ है।
रसोई गैस पर चौतरफा मार: घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े
ईंधन के साथ-साथ रसोई गैस की कीमतों में भी जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में लंबे समय से 853 रुपये में मिलने वाला 14.2 किलो का घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब हजार रुपये के करीब पहुंच रहा है:
- 7 मार्च: पहली बार कीमतों में 60 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की गई, जिससे दाम 913 रुपये हो गए।
- जून की शुरुआत: तीन महीने बाद एक बार फिर 29 रुपये की वृद्धि की गई।
- ताजा स्थिति: अब दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 942 रुपये तक पहुंच चुकी है।
वहीं दूसरी ओर, 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। महज तीन महीने के भीतर इसमें 1,373 रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है:
- फरवरी में कीमत: ₹1,740.50
- 1 जून 2026 को कीमत: ₹3,113.50 (मई के महीने में अकेले ₹993 का ऐतिहासिक इजाफा हुआ था)
CNG भी ₹80 के पार, दिल्ली-NCR में हाहाकार
सिर्फ गाड़ियां और रसोई ही नहीं, बल्कि सीएनजी पर चलने वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट और निजी वाहनों को भी बड़ा झटका लगा है। पिछले कुछ ही दिनों में सीएनजी की कीमतें तीन बार बढ़ाई जा चुकी हैं:
- दिल्ली: ₹81.09 प्रति किलोग्राम
- गुरुग्राम: ₹86.12 प्रति किलोग्राम
- नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद: ₹89.70 प्रति किलोग्राम
बजट बिगड़ा, और बढ़ सकती है महंगाई
पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की इस त्रिमूर्ति ने देश में लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन को बेहद महंगा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका संकट जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में दूध, सब्जियां और रोजमर्रा के राशन के सामान और भी महंगे हो सकते हैं। ऊर्जा संकट गहराने के साथ अब पूरा बाजार आने वाले दिनों की कीमतों पर नजरें गड़ाए बैठा है।
