झारखंड हाईकोर्ट पर जताई थी चिंता, अब सुप्रीम कोर्ट लाया विशेष ‘समाधान’ अभियान; अगस्त में लगेगी स्पेशल लोक अदालत

वर्षों पुराने केसों से मुक्ति दिलाएगा 'समाधान समारोह-2026', ऑनलाइन व ऑफलाइन मोड में अगस्त तक निपटाए जाएंगे पारिवारिक, टैक्स और चेक बाउंस से जुड़े मामले।

Johar News Times
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झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों की अदालतों में सालों से लंबित पड़े मुकदमों के त्वरित और आपसी सहमति से निपटारे के लिए देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। शीर्ष अदालत की ओर से देशव्यापी स्तर पर ‘समाधान समारोह-2026’ अभियान चलाया जा रहा है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य मध्यस्थता और लोक अदालत के माध्यम से मुकदमों को बिना किसी लंबी कानूनी खींचतान के सुलझाना है।

यह विशेष अभियान बीते 21 अप्रैल 2026 से ही शुरू हो चुका है, जो लगातार जारी है। इसका भव्य समापन आगामी 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत के आयोजन के साथ किया जाएगा।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का ‘SAMADHAN’ अभियान?

सुप्रीम कोर्ट ने इस राष्ट्रव्यापी मुहिम को “SAMADHAN SAMAROH” नाम दिया है। इस पहल के पीछे का मूल उद्देश्य आम और गरीब तबके के लोगों को सस्ता, सुलभ और बेहद त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। सर्वोच्च न्यायालय का मानना है कि यदि पक्षकार आपस में बैठकर सहमति से विवादों का समाधान निकालेंगे, तो इससे न सिर्फ लोगों का कीमती समय और पैसा बचेगा, बल्कि वर्षों से अदालतों पर बना मुकदमों का भारी बोझ भी कम होगा।

झारखंड के लिए क्यों बेहद महत्वपूर्ण है यह पहल?

झारखंड के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का यह कदम बेहद खास और मायने रखने वाला माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले कुछ समय में मुकदमों के लंबित रहने और फैसलों में अत्यधिक देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट पर कई बार गंभीर चिंता व्यक्त की थी। शीर्ष अदालत ने झारखंड में लंबित फैसलों की स्थिति को “गंभीर स्थिति” करार दिया था और राज्य में समय पर न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर सख्त जोर दिया था। ऐसे में इस अभियान से झारखंड के लोगों को सबसे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

इन मामलों का चुटकियों में होगा निपटारा

‘समाधान समारोह-2026’ के तहत विभिन्न प्रकार के सिविल और शमनीय आपराधिक मामलों को सुलझाया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • पारिवारिक और वैवाहिक विवाद
  • चेक बाउंस के मामले
  • बैंकिंग लोन और रिकवरी विवाद
  • मोटर दुर्घटना मुआवजा दावा
  • उपभोक्ता और रेरा विवाद
  • भूमि अधिग्रहण, श्रम विवाद और टैक्स से जुड़े मामले

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जुड़ने की सुविधा

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन के अनुसार, इस मुहिम को हाईटेक और डिजिटल बनाया गया है। मामले से जुड़े पक्षकार, उनके अधिवक्ता और संबंधित हितधारक अपनी सुविधानुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही माध्यमों से इस समाधान प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष डेडिकेटेड पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि झारखंड में इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार होता है और लोग आगे आते हैं, तो अदालतों में लंबित मुकदमों का अंबार काफी हद तक साफ हो जाएगा।

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