पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की खदान से प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच चल रही तनातनी अब निर्णायक मोड़ पर है। मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के नेतृत्व में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बेनतीजा रहने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

मुख्य विवाद और मांगें
ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। आंदोलन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- रोजगार का मुद्दा: ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 500 स्थानीय युवाओं को रोजगार से वंचित रखा गया है। साथ ही, पूर्व में कार्यरत 72 युवकों को हटाए जाने के बाद उन्हें दोबारा काम पर नहीं रखा गया।
- प्रदूषण और स्वास्थ्य: खदान से निकलने वाले अपशिष्ट (वेस्ट) के कारण उपजाऊ कृषि भूमि बंजर हो रही है। जल स्रोत दूषित हो चुके हैं, जिससे स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
- विस्थापन की समस्या: प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और विस्थापन की नीतियों को लेकर भी प्रबंधन का रुख स्पष्ट नहीं है।
आंदोलन का घटनाक्रम (Timeline)
अपनी आवाज बुलंद करने के लिए ग्रामीणों ने पिछले कई महीनों से चरणबद्ध आंदोलन किया है:
- 13 फरवरी 2026: पहला धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपा गया।
- 27 फरवरी 2026: मांगों की अनदेखी पर चार घंटे का सांकेतिक धरना।
- 15-17 अप्रैल 2026: तीन दिवसीय भूख हड़ताल।
- 20 अप्रैल 2026: गुवा सेल जनरल ऑफिस के समक्ष अनिश्चितकालीन ‘चक्का जाम’ किया गया।
- मंगलवार (हालिया): प्रशासन के हस्तक्षेप पर वार्ता आयोजित की गई, जो विफल रही।
वार्ता में शामिल प्रतिनिधि
मंगलवार को हुई बैठक में ग्रामीणों का पक्ष रखने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा स्वयं मौजूद थे। उनके साथ मांगता सोरेन, सुरेश चाम्पिया, सारंडा पीठ मानकी, मंगल पुर्ति, डुरसु चंपिया, गोकुल देवगम समेत अन्य ग्राम प्रधान और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। वार्ता में कोई ठोस निर्णय न होने के कारण ग्रामीणों ने आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी है। प्रशासन के लिए अब इस गतिरोध को सुलझाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।









