झारखंड के नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय (NPU) में डायरेक्टर पद की भर्ती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह के एक फैसले ने विश्वविद्यालय परिसर में बहस और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है। आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में निदेशक का पद सृजित किया गया और फिर उसकी नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित कर दिए गए।
जानकारों के अनुसार, विश्वविद्यालय में किसी भी नए पद के सृजन और मानदेय निर्धारण के लिए वित्त समिति की स्वीकृति अनिवार्य होती है। लेकिन इस मामले में न तो वित्त समिति की मंजूरी ली गई और न ही प्रस्ताव को संबंधित वैधानिक समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके बावजूद 21 और 22 जनवरी 2026 को जल्दबाजी में एकेडमिक काउंसिल और सिंडिकेट से इसे पारित करा लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पात्रता शर्तों पर भी उठे सवाल
विवाद का दूसरा बड़ा कारण निदेशक पद के लिए तय की गई पात्रता शर्तें हैं। विज्ञापन में ऐसी शर्तें रखी गई हैं, जिनके तहत केवल NPU से सेवानिवृत्त और 68 वर्ष से कम आयु के शिक्षाविद ही आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही 30 वर्षों का शिक्षण अनुभव और पांच वर्षों का प्रशासनिक अनुभव अनिवार्य किया गया है। इन शर्तों के कारण अन्य विश्वविद्यालयों के अभ्यर्थियों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है, जिससे ‘पूर्व निर्धारित नाम’ को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है।
यूजी कोर्स को लेकर भी उठे तकनीकी सवाल
इसी बीच, विश्वविद्यालय द्वारा यूजी स्तर के प्रोफेशनल कोर्स को अपने अधीन लाने के फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमों के अनुसार, यूजी कोर्स कॉलेज स्तर पर संचालित होते हैं, जबकि विश्वविद्यालय स्तर पर मुख्यतः पीजी कोर्स चलाए जाते हैं। ऐसे में इस निर्णय को तकनीकी रूप से भी विवादित बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में संचालित वोकेशनल और प्रोफेशनल कोर्स को समेकित कर इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के अंतर्गत लाया गया है, जहां छात्रों के पठन-पाठन और फैकल्टी की व्यवस्था की गई है।
कुलपति ने दी सफाई
इस पूरे मामले पर कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि निदेशक पद के लिए विधिवत विज्ञापन जारी किया गया है और अब तक चार लोगों ने आवेदन किया है। उन्होंने बताया कि चयन समिति जिस उम्मीदवार को योग्य पाएगी, उसे 11 माह के संविदा पर नियुक्त किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रस्ताव को एकेडमिक काउंसिल और सिंडिकेट से पारित कराया गया है।









