पटमदा में 10 माह पहले खत्म हो चुकी लीज के बाद भी खनन जारी होने का आरोप, नई लीज की तैयारी से बढ़ी चिंता

पटमदा में 10 माह पहले खत्म हो चुकी लीज के बाद भी खनन जारी होने का आरोप, नई लीज की तैयारी से बढ़ी चिंता

Johar News Times
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पटमदा के चिरूडीह गांव में पत्थर खनन को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। गांव की पुरानी खदानों की वैध लीज करीब 10 माह पहले समाप्त हो चुकी है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद अवैध खनन जारी है। अब रैयती पहाड़ी पर नई खनन लीज की प्रक्रिया शुरू होने से विरोध तेज हो गया है। वहीं काकू गांव में भी 5.90 एकड़ (करीब 18 बीघा) भूमि पर खनन की योजना है, जिसमें 12 बीघा जमीन दांदूडीह के रैयतदारों की बताई जा रही है।

दरकते घरों ने बढ़ाई चिंता

चिरूडीह में कई मकानों की दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक हुए डायनामाइट विस्फोटों और लगातार कंपन के कारण मकानों को नुकसान पहुंचा है। उनका डर है कि यदि दोबारा बड़े पैमाने पर खनन शुरू हुआ तो गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा।

ग्रामसभा की सहमति पर विवाद

चिरूडीह में चार एकड़ रैयती पहाड़ी पर खनन लीज की प्रक्रिया चल रही है। ग्राम प्रधान अनिल महतो का दावा है कि 18 मई को आयोजित ग्रामसभा में खनन के पक्ष में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ था और 1100 की आबादी वाले गांव में 316 लोगों ने समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि ग्रामीणों का एक वर्ग इसका विरोध कर रहा है। उनका आरोप है कि विभिन्न कार्यों के बहाने लोगों से आधार कार्ड की प्रतियां, हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लेकर 500 रुपये दिए गए तथा इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग ग्रामसभा की सहमति के रूप में किया जा रहा है। ग्राम प्रधान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमों और ग्रामसभा की सहमति के अनुसार चल रही है।

काकू गांव में सुरक्षा और पर्यावरण की चिंता

काकू गांव के ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खनन स्थल आंगनबाड़ी केंद्र से महज 300 फीट दूर है और इसके समीप घनी आबादी है। ऐसे में ब्लास्टिंग से बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ग्रामीणों ने प्राकृतिक झरने के सूखने, खेतों की उर्वरता प्रभावित होने, पत्थर की धूल से खेती को नुकसान पहुंचने और मकानों में दरारें बढ़ने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि वे किसी भी कीमत पर खनन नहीं होने देंगे।

ग्रामीणों ने बताई अपनी पीड़ा

ग्रामीण पूर्णोचंद महतो का कहना है कि डायनामाइट विस्फोटों के झटकों से उनके घर की दीवारों में गहरी दरारें पड़ गई हैं और भय के कारण घर के एक हिस्से का उपयोग नहीं किया जाता। वहीं रेबोती सिंह का कहना है कि रात में होने वाले विस्फोटों से पूरी धरती कांप उठती है, जबकि दिनभर पत्थर की धूल उड़ती रहती है।

प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा

एसडीओ सह अनुमंडल स्तरीय खनन टास्क फोर्स के अध्यक्ष अर्णव मिश्रा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि हुरुंगबिल, गेरूवाला और समरजोबड़ा में अवैध खनन की शिकायतों की भी जांच होगी। चिरूडीह और काकू गांव में किसी भी खनन पट्टे के आवंटन से पहले ग्रामीणों की राय और जनभावनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

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