30 साल बाद खत्म हुआ सामाजिक बहिष्कार, पांच परिवारों की गांव की मुख्यधारा में हुई वापसी

30 साल बाद खत्म हुआ सामाजिक बहिष्कार, पांच परिवारों की गांव की मुख्यधारा में हुई वापसी

Johar News Times
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डुमरिया: पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत मांरांगसोंघा गांव में तीन दशक से सामाजिक बहिष्कार झेल रहे पांच परिवारों को प्रशासन और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से फिर से गांव की मुख्यधारा में शामिल कर लिया गया। इस पहल के साथ वर्षों से चले आ रहे सामाजिक विवाद का पटाक्षेप हो गया।

ग्राम सभा की अध्यक्षता बुधराम हेंब्रम ने की, जबकि बैठक में प्रखंड विकास पदाधिकारी निलेश कुमार मुर्मू मौजूद रहे। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मौके पर पुलिस बल की भी तैनाती की गई थी। ग्राम सभा में बहिष्कृत परिवारों के सदस्य धानो हेंब्रम, सिंगराई किस्कू, प्रधान पाड़ेया, डुगु हेंब्रम और मालती सोरेन ने गांव के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने तथा सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने का भरोसा दिया।

30 वर्षों से लगा रहे थे सरकारी दफ्तरों के चक्कर

बताया गया कि ये परिवार करीब 30 वर्षों से गांव की पारंपरिक व्यवस्था से अलग-थलग पड़े हुए थे। अपनी समस्या के समाधान के लिए वे लगातार थाना, प्रखंड कार्यालय और उपायुक्त कार्यालय का चक्कर लगा रहे थे। इस दौरान कई बार दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हुई थी। प्रखंड विकास पदाधिकारी निलेश कुमार मुर्मू ने कहा कि समाज का विकास आपसी सहयोग, भाईचारे और सौहार्दपूर्ण वातावरण में ही संभव है। उन्होंने दोनों पक्षों से पुराने मतभेद भुलाकर गांव के विकास के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की।

समझौते के बाद बहिष्कृत परिवारों ने ग्रामीणों को जोहार कर अभिवादन किया और मुख्यधारा में शामिल होने पर खुशी जताई। ग्राम सभा में रामो पाड़ेया, मंगल पाड़ेया, खुदिया सोरेन, रघुनाथ हेंब्रम, रघु किस्कू, पालू किस्कू, रघुनाथ पाड़ेया, अंता सोरेन समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। मांझी परगना महाल के घाट परगना लखन मार्डी भी बैठक में शामिल हुए। ग्रामीणों ने इस समझौते को गांव में सामाजिक सौहार्द, एकता और सामुदायिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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