दुमका : कोयले की काली धूल और उससे होने वाले भयंकर प्रदूषण के खिलाफ दुमका की जनता ने पांच सालों तक जो शांतिपूर्ण और अडिग लड़ाई लड़ी, आखिरकार उसे ऐतिहासिक कामयाबी मिल गई है। ईस्टर्न रेलवे द्वारा दुमका रेलवे स्टेशन परिसर में संचालित कोयला डंपिंग यार्ड को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के फैसले के बाद रसिकपुर और आसपास के पूरे इलाके में जश्न का माहौल है। सोमवार को प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता रविशंकर मंडल के नेतृत्व में स्थानीय आंदोलनकारियों ने जमकर आतिशबाजी की और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर इस जीत की खुशी मनाई।
हर रविवार धरना, एनजीटी तक पहुंची थी लड़ाई
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रविशंकर मंडल ने इस कड़े संघर्ष की कहानी साझा करते हुए बताया कि इस डंपिंग यार्ड को हटाने के लिए पिछले 5 वर्षों से लगातार अभियान चलाया जा रहा था। इस आंदोलन की खास बात यह थी कि आंदोलनकारियों ने बिना थके प्रत्येक रविवार को धरना-प्रदर्शन किया।
इस जनहित की लड़ाई के दौरान प्रशासन से लेकर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) तक का दरवाजा खटखटाया गया। आंदोलन को कुचलने के लिए कई प्रमुख कार्यकर्ताओं पर मुकदमे भी दर्ज किए गए, लेकिन दुमका की जनता अपने स्वास्थ्य और हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटी।
जानलेवा बीमारी का सबब बन चुका था कोयला यार्ड
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, शहर के बीचो-बीच और रेलवे स्टेशन के पास स्थित इस कोयला यार्ड से दिन-रात उड़ने वाली काली धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया था। इसके कारण रसिकपुर और आसपास के बच्चों व बुजुर्गों में श्वास संबंधी (दमा, टीबी) और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही थीं। लगातार बढ़ते जनदबाव और जायज तर्कों के आगे झुकते हुए आखिरकार ईस्टर्न रेलवे ने यार्ड को यहाँ से पूरी तरह हटाने का आधिकारिक निर्णय ले लिया।
केंद्रीय मंत्रियों और सीता सोरेन का जताया आभार
रविशंकर मंडल ने इस सफलता को किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे दुमका शहर के सजग नागरिकों की सामूहिक जीत बताया। उन्होंने जनभावनाओं को समझने के लिए ईस्टर्न रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देवस्कर, केंद्रीय रेल मंत्री, केंद्रीय कोयला मंत्री तथा जामा की पूर्व विधायक और भाजपा नेत्री सीता सोरेन के प्रति विशेष रूप से आभार प्रकट किया, जिन्होंने इस मामले में सकारात्मक पहल की।
इस विजय उत्सव और जश्न के मौके पर मुख्य रूप से विष्णु यादव, संजय मंडल, अभय गुप्ता, गोवर्धन मंडल, जिमी यादव, मिकू यादव, मंजू गुप्ता, हेमंत श्रीवास्तव, मनोज कुमार, जगरनाथ पंडित, नित्यानंद कुमार, डॉ. बी. मरांडी, आशीष नायक, डिस्को मंडल, आकाश कुमार और प्रदीप कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय आंदोलनकारी और महिलाएं उपस्थित थीं।
