सरायकेला: झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरायकेला-खरसावां जिले के मनरेगा कर्मी पिछले 27 दिनों से काम का बहिष्कार कर रहे हैं। बुधवार को सरायकेला में संघ के जिलाध्यक्ष शंकर सतपति की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें आंदोलन की समीक्षा और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई।
मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट बैठक के दौरान जिलाध्यक्ष शंकर सतपति ने सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लगभग एक महीना बीतने को है, लेकिन सरकार ने अब तक कर्मचारियों की सुध लेना उचित नहीं समझा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा कार्य पूरी तरह ठप हैं, जिससे सीधे तौर पर मनरेगा मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
बैठक के मुख्य बिंदु:
- अनदेखी से नाराजगी: कर्मियों का कहना है कि वे अपनी जायज मांगों के लिए सड़क पर हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार की चुप्पी उनकी समस्याओं को और बढ़ा रही है।
- रणनीति तैयार: बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, आंदोलन को और भी मजबूती से जारी रखा जाएगा।
- प्रभाव: जिले में विकास योजनाओं की गति धीमी पड़ गई है और डेटा एंट्री से लेकर फील्ड वर्क तक के काम बाधित हैं।
आगे की राह मनरेगा कर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी मांगों (जैसे सेवा स्थायीकरण और वेतन विसंगति) को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कब वार्ता की पहल करती है।









