नई दिल्ली | 7 अप्रैल, 2026: भारत के संवैधानिक इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की विशाल संविधान पीठ ने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और उनके मौलिक अधिकारों से जुड़े विवादों पर अंतिम सुनवाई शुरू कर दी है।
सुनवाई का केंद्र: ‘संवैधानिक नैतिकता’ (Constitutional Morality)
कोर्ट केवल मंदिरों या मस्जिदों की बात नहीं कर रहा, बल्कि यह तय कर रहा है कि अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) में से किसका पलड़ा भारी रहेगा।
सुनवाई के 5 ‘अग्नि-परीक्षा’ वाले मुद्दे:
- सबरीमाला का गतिरोध: क्या 10 से 50 वर्ष की महिलाओं पर प्रतिबंध ‘अनिवार्य धार्मिक प्रथा’ (Essential Religious Practice) का हिस्सा है?
- मस्जिदों में प्रवेश: क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में नमाज पढ़ने से रोकना असंवैधानिक है?
- पारसी महिलाओं का अधिकार: गैर-पारसी से विवाह के बाद क्या महिला की धार्मिक पहचान और अग्नि मंदिर (Fire Temple) में प्रवेश का अधिकार खत्म हो जाता है?
- दाऊदी बोहरा प्रथा: क्या ‘फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन’ (FGM) जैसी प्रथाएं धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर संरक्षित की जा सकती हैं?
- धर्म और लैंगिक न्याय: क्या धार्मिक नियम संविधान द्वारा दिए गए ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन कर सकते हैं?
सुनवाई का शेड्यूल:
- प्रारंभ: 7 अप्रैल, 2026
- समापन (संभावित): 22 अप्रैल, 2026
- प्रक्रिया: कोर्ट ने सभी पक्षों (याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों) के लिए समय सीमा तय कर दी है ताकि 15 दिनों के भीतर दलीलें पूरी की जा सकें।









