धनबाद: कोयला चोरी और अवैध खनन की लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय ने कोयला चोरी की घटनाओं, रोकथाम के उपायों, सुरक्षा व्यवस्था, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी मांगी है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय को बीसीसीएल की कई कोलियरियों और आउटसोर्सिंग परियोजनाओं के आसपास बड़े पैमाने पर कोयले की अवैध निकासी की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद बीसीसीएल प्रबंधन को पूरे मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल पहले भी सार्वजनिक रूप से कोयला चोरी को गंभीर चुनौती बता चुके हैं।
आकलनों के मुताबिक, धनबाद कोयलांचल में हर वर्ष करीब ₹4500 करोड़ मूल्य के कोयले की अवैध निकासी हो रही है, जिससे केंद्र सरकार, बीसीसीएल और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि लगभग 50 आउटसोर्सिंग परियोजनाओं और 50 से अधिक अवैध खनन स्थलों से प्रतिदिन 400 से ज्यादा वाहनों के जरिए 25 से 30 हजार टन कोयले की अवैध ढुलाई और बिक्री की जा रही है।
बीसीसीएल कोयला चोरी रोकने के लिए हर साल करीब ₹500 करोड़ सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च करती है। इसमें सीआईएसएफ के लगभग 3,000 जवानों का वेतन, सुरक्षा उपकरण और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। कंपनी ने ड्रोन निगरानी, डिजिटल सर्विलांस और जीपीएस आधारित ट्रैकिंग जैसी तकनीकों को भी अपनाया है, लेकिन विशाल खनन क्षेत्र और संगठित गिरोहों की सक्रियता के कारण चुनौती बनी हुई है। अवैध खनन का असर अब जनसुरक्षा पर भी दिखने लगा है। बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो के अनुसार सोनारडीह क्षेत्र में हालात गंभीर हैं। चिरकुंडा-टाटा मुख्य मार्ग, लोयाबाद क्षेत्र तथा धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन के आसपास भू-धंसान और जमीन कमजोर होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
इस मुद्दे पर केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी, केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, विधायक अरूप चटर्जी और रागिनी सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि चिंता जता चुके हैं। मंत्रालय ने भी अवैध खनन को गंभीर चुनौती मानते हुए सख्त निगरानी और संयुक्त कार्रवाई पर जोर दिया है। बीसीसीएल ने कहा है कि मंत्रालय के निर्देश के बाद विभिन्न क्षेत्रों से जानकारी जुटाई जा रही है और निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट भेज दी जाएगी। अब नजर इस बात पर है कि कोयला चोरी के इस संगठित नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई कब होती है।
