झारखंड राज्यसभा चुनाव: बैद्यनाथ राम, प्रणव झा और परिमल नथवानी ने भरा पर्चा; त्रिकोणीय मुकाबले से थ्रिलर हुआ चुनाव

"रणबांकुरे तैयार! सीएम हेमंत सोरेन की मौजूदगी में बैद्यनाथ राम और प्रणव झा ने किया नामांकन, जीत का दावा।"

Johar News Times
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रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई। अंतिम दिन महागठबंधन के उम्मीदवारों और जाने-माने उद्योगपति परिमल नथवानी के नामांकन दाखिल करने के बाद अब चुनावी रण बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो गया है।

सीएम हेमंत सोरेन की मौजूदगी में महागठबंधन का शक्ति प्रदर्शन

महागठबंधन की ओर से दोनों सीटों के लिए बैद्यनाथ राम और प्रणव झा ने अपना-अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों, विधायकों और गठबंधन के दिग्गज नेताओं ने विधानसभा पहुंचकर दोनों प्रत्याशियों का हौसला बढ़ाया। नामांकन के बहाने महागठबंधन ने सदन के भीतर और बाहर अपनी मजबूत एकजुटता का जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया और संख्या बल के आधार पर दोनों सीटों पर एकतरफा जीत का दावा ठोका।

परिमल नथवानी की एंट्री, भाजपा विधायकों की मौजूदगी से बढ़ा सस्पेंस

इस चुनाव में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब जाने-माने उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया। नथवानी के नामांकन के वक्त भाजपा विधायक रागिनी सिंह और नवीन जायसवाल समेत कई बड़े चेहरों की मौजूदगी ने सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस बार जानबूझकर अपना कोई आधिकारिक उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है, जो नथवानी को परोक्ष समर्थन देने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, जदयू, लोजपा और आजसू के कुछ विधायक भी नथवानी के प्रस्तावक बने हैं, जिससे उनकी दावेदारी अचानक बेहद मजबूत नजर आने लगी है।

झारखंड से पुराना नाता, दिलचस्प हुई दोनों सीटों की जंग

आपको बता दें कि परिमल नथवानी का झारखंड की राजनीति और उद्योग जगत से बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है। वह इससे पहले साल 2008 और 2014 में भी झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। हालांकि, वर्तमान में वह आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं, लेकिन झारखंड की दो सीटों के लिए एक बार फिर उनकी इस एंट्री ने चुनाव को बेहद कांटे का बना दिया है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वोटिंग के दिन क्रॉस वोटिंग होती है या नहीं, और ऊंट किस करवट बैठता है।

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