JTET भाषा विवाद पर मंत्रियों में नहीं बनी सहमति, अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लेंगे अंतिम फैसला

JTET भाषा विवाद पर मंत्रियों में नहीं बनी सहमति, अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लेंगे अंतिम फैसला

Johar News Times
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रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने का विवाद अभी सुलझ नहीं पाया है। इस मुद्दे पर गठित मंत्रियों की उच्च स्तरीय समिति की अहम बैठक बुधवार को भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। अब समिति अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपेगी, जिनका निर्णय अंतिम माना जाएगा। बैठक में भाषाई मुद्दे पर मंत्रियों के बीच स्पष्ट मतभेद देखने को मिले। समिति में शामिल कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और मंत्री हफिजुल हसन अंसारी ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को JTET में शामिल करने का विरोध किया। वहीं मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और योगेंद्र प्रसाद महतो भी पहले से इसके विरोध में हैं। इस तरह छह सदस्यीय समिति में चार मंत्री इन भाषाओं को शामिल करने के खिलाफ नजर आए।

दूसरी ओर, समिति के संयोजक एवं वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और मंत्री संजय प्रसाद यादव इन भाषाओं को परीक्षा में शामिल करने के पक्ष में अपनी राय पर कायम रहे। बैठक के दौरान राधाकृष्ण किशोर ने सुझाव दिया कि यदि इन तीन भाषाओं को शामिल नहीं किया जाता है तो पेपर-2 में हिंदी को अनिवार्य किया जाए। हालांकि अन्य मंत्रियों ने तर्क दिया कि पेपर-1 में हिंदी पहले से शामिल है, इसलिए इसकी आवश्यकता नहीं है।

विरोध करने वाले मंत्रियों का कहना था कि झारखंड की क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि जब स्कूलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका की पढ़ाई नहीं होती, तो इन्हें JTET में शामिल करने का औचित्य नहीं है। वहीं हफिजुल हसन अंसारी ने तर्क दिया कि ये बिहार की मूल भाषाएं हैं और बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में भी इन्हें शामिल नहीं किया गया है।

समर्थन में खड़ी दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए और अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए। राधाकृष्ण किशोर ने भी इसी तर्क का समर्थन किया। समिति के संयोजक ने बताया कि यह इस विषय पर अंतिम बैठक थी। अब सभी सदस्य चाहें तो एक-दो दिन के भीतर अपनी लिखित राय दे सकते हैं। इसके बाद पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजी जाएगी, जिनके निर्णय के बाद JTET भाषा विवाद पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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