भारतीय रसोई, खासकर उत्तर भारत में सरसों का तेल सिर्फ खाना पकाने का माध्यम नहीं, बल्कि सेहत और परंपरा का हिस्सा है। मालिश से लेकर घरेलू नुस्खों तक में इसका उपयोग होता है। हालांकि, बाजार में बढ़ती मिलावट ने इसे सेहत के लिए खतरनाक बना दिया है। मिलावटी तेल के सेवन से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
आपकी सेहत से खिलवाड़ न हो, इसके लिए FSSAI और विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए ये 6 आसान टेस्ट आपकी मदद कर सकते हैं:
शुद्धता जांचने के 6 सटीक तरीके
- रंग और गाढ़ापन: असली सरसों का तेल गहरा पीला या सुनहरा होता है। यह हल्का गाढ़ा होता है। यदि तेल बहुत ज्यादा पारदर्शी या पतला दिखे, तो उसमें मिलावट की संभावना अधिक होती है।
- तीखी खुशबू: शुद्ध तेल की गंध बहुत तेज और तीखी होती है। इसे सूंघने पर नाक में हल्की झनझनाहट महसूस होती है। मिलावटी तेल में यह प्राकृतिक तीखापन गायब रहता है।

- स्वाद का टेस्ट: असली तेल का स्वाद चखने पर थोड़ा कड़वा और तीखा लगता है। शुद्ध तेल की एक बूंद गले में हल्की जलन पैदा करती है, जो इसकी मौलिकता का प्रमाण है।
- फ्रिज टेस्ट: तेल की शुद्धता परखने का यह सबसे आसान तरीका है। थोड़ा सा तेल कटोरी में डालकर फ्रिज में रख दें। शुद्ध तेल ठंड में हल्का जमने लगता है या उस पर सफेद परत दिखने लगती है, जबकि मिलावटी तेल वैसा ही बना रहता है।
- झाग का परीक्षण: जब आप असली सरसों तेल को गर्म करते हैं, तो उसमें से हल्का झाग निकलता है और उसकी खुशबू और तेज हो जाती है। यदि झाग असामान्य रूप से ज्यादा हो या कोई रासायनिक गंध आए, तो वह संदिग्ध हो सकता है।
- ब्रांड और सर्टिफिकेशन: हमेशा भरोसेमंद ब्रांड का ही पैक्ड तेल खरीदें। बोतल पर FSSAI मार्क, निर्माण तिथि और ‘100% Pure’ का लेबल जरूर चेक करें। खुले तेल को खरीदने से बचें।
मिलावटी तेल में अक्सर सस्ते आर्गेमोन तेल या हानिकारक रसायनों का प्रयोग किया जाता है, जो लिवर और दिल की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। थोड़ी सी सावधानी आपकी और आपके परिवार की सेहत की रक्षा कर सकती है।

