जादूगोड़ा में आदिवासी स्वशासन और पेसा नियमावली पर कार्यशाला, ग्रामसभा की भूमिका पर दिया गया जोर

जादूगोड़ा में आदिवासी स्वशासन और पेसा नियमावली पर कार्यशाला, ग्रामसभा की भूमिका पर दिया गया जोर

Johar News Times
2 Min Read

जादूगोड़ा स्थित प्रसिद्ध रंकनी मंदिर परिसर के धूमकुड़िया भवन में रविवार को आदिवासी स्वशासन एवं पेसा नियमावली विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पर्यावरण चेतना केन्द्र, बड़ा सिकदी (पोटका) के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व संस्था के निर्देशक सिदेश्वर सरदार ने किया।

कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में सिदेश्वर सरदार ने पेसा कानून, 1996 की विस्तृत जानकारी देते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह कानून अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को सशक्त बनाने और आदिवासी स्वशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया गया है, जिसमें ग्रामसभा को सर्वोच्च इकाई के रूप में मान्यता प्राप्त है।

- Advertisement -
Ad image

उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि पेसा कानून के तहत ग्रामसभा को विकास योजनाओं की स्वीकृति देने, खर्च की निगरानी करने, लाभुकों के चयन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। साथ ही भूमि अधिग्रहण से पूर्व ग्रामसभा से परामर्श को अनिवार्य बनाया गया है, जो आदिवासी हितों की सुरक्षा के लिए एक अहम प्रावधान है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों को जल, जंगल और जमीन पर उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। अंत में सिदेश्वर सरदार ने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अपनी परंपराओं और स्वशासन प्रणाली को जीवित रखें, ताकि आदिवासी समाज की पहचान और उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें।

Share This Article