सरायकेला में हाथियों का तांडव, शीशी गांव में घर की दीवार तोड़ खा गए अनाज; दहशत में रात गुजारने को मजबूर ग्रामीण

Johar News Times
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जिले के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला चांडिल वन क्षेत्र के शीशी गांव का है, जहां सोमवार देर रात एक जंगली हाथी ने अंगद सिंह मुंडा के घर पर हमला बोल दिया। हाथी ने न सिर्फ घर की दीवार को मलबे में तब्दील कर दिया, बल्कि घर के भीतर रखा सारा अनाज और चावल चट कर गया। इस खौफनाक मंजर के बीच पीड़ित परिवार रात भर दुबक कर जान बचाने की भीख मांगता रहा।

आधी रात को ढही दीवार, बच्चों की चीख-पुकार के बीच बीती रात

घटना सोमवार देर रात करीब 1:00 बजे की है। ग्रामीणों के मुताबिक, पूरा परिवार सोया हुआ था कि अचानक जोरदार आवाज के साथ घर की दीवार ढह गई। जब तक लोग कुछ समझ पाते, एक विशालकाय हाथी घर के मलबे से अंदर दाखिल हो चुका था।

पीड़ित ग्रामीण ने बयां किया दर्द: रात करीब 1 बजे अचानक जोर से आवाज आई। उठकर देखा तो हाथी दीवार तोड़कर अंदर रखा चावल खा रहा था। हम सब डर से कांप रहे थे, बच्चे रोने लगे। हम सुबह होने तक कमरे के एक कोने में दुबके रहे। अब हमारे पास खाने को एक दाना भी नहीं बचा है।”

कागजों पर खर्च हो रहे हजारों, जमीन पर वन विभाग ‘लाचार’

इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि चांडिल वन विभाग की टीम रोज हाथी भगाने के नाम पर सरकारी खजाने से हजारों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य है। ग्रामीणों का कहना है कि सूचना देने के बावजूद वन कर्मी समय पर नहीं पहुंचते हैं।

  • ग्रामीणों का सीधा आरोप: “हाथी रोज तबाही मचा रहे हैं और वन विभाग सिर्फ कागजों पर खर्च दिखा रहा है। जमीन पर न तो टॉर्च की व्यवस्था है, न पटाखा और न ही कोई क्विक रिस्पांस टीम। हम ग्रामीण भगवान भरोसे रातें काट रहे हैं।”

क्यों गांवों का रुख कर रहे हैं हाथी?

विशेषज्ञों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, दलमा सेंचुरी (Dalma Sanctuary) से हाथियों का झुंड पलायन कर ईचागढ़ क्षेत्र में डेरा डाले हुए है। जंगलों में लगातार कम होती भोजन की उपलब्धता और नदी-नालों में बेतरतीब तरीके से हो रहे अवैध बालू खनन के कारण हाथियों का प्राकृतिक आवास बाधित हुआ है। यही वजह है कि भोजन और पानी की तलाश में हाथी अब रिहायशी इलाकों और गांवों का रुख कर रहे हैं।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

ईचागढ़ में अब मानव-हाथी संघर्ष (Man-Elephant Conflict) एक गंभीर और संवेदनशील रूप ले चुका है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने हाथियों को खदेड़ने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई और पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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