ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के सेनापति माने जाने वाले मंगल देव कल यानी 21 जून (रविवार) को वृषभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। साहस, पराक्रम और ऊर्जा के कारक मंगल का यह गोचर दोपहर या शाम की अवधि में होगा, जहाँ वे 2 अगस्त तक (कुल 42 दिनों तक) विराजमान रहेंगे। खगोल विज्ञान और ज्योतिष के दृष्टिकोण से इस महापरिवर्तन का असर सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। जहाँ कुछ राशियों के लिए यह समय भाग्य बदलने वाला होगा, वहीं मिथुन और तुला समेत 6 राशियों के लिए आने वाले 42 दिन काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है मंगल का वृषभ राशि में जाना?
वृषभ राशि का स्वामी ‘शुक्र’ है, जो मंगल के साथ सम-शत्रुता का भाव रखता है। मंगल का यहाँ आना व्यक्ति के आर्थिक निर्णयों, स्वभाव और कार्यक्षमता को सीधे प्रभावित करेगा। इस अवधि में जातकों के भीतर आक्रामकता और जल्दबाजी बढ़ सकती है, जिसके कारण बनते काम भी बिगड़ सकते हैं।
इन 6 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान
- मिथुन राशि: कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ अनबन हो सकती है। बातचीत के दौरान अपने अहंकार पर नियंत्रण रखें, अन्यथा मान-हानि की संभावना है।
- तुला राशि: वाणी में कटुता के कारण बने-बनाए संबंध बिगड़ सकते हैं। मानसिक तनाव बढ़ सकता है, इसलिए धैर्य से काम लें।
- अन्य 4 राशियाँ: ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, बाकी चार प्रभावित राशियों को भी अपने निवेश और व्यक्तिगत रिश्तों में बहुत सोच-समझकर कदम आगे बढ़ाने की सलाह दी गई है।
आर्थिक और व्यावहारिक जीवन पर असर: भूलकर भी न करें ये गलतियाँ
- जोखिम भरे निवेश से बचें: 21 जून से 2 अगस्त के बीच शेयर बाजार, प्रॉपर्टी या किसी भी बड़े और जोखिम भरे निवेश से दूर रहें।
- वाद-विवाद से दूरी: कार्यक्षेत्र या परिवार में बहसबाजी की स्थिति से बचें। मंगल का प्रभाव विवादों को कोर्ट-कचहरी तक खींच सकता है।
- जल्दबाजी में फैसले न लें: कोई भी बड़ा आर्थिक या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह ज़रूर लें।
मंगल के नकारात्मक प्रभाव से बचने के अचूक उपाय
यदि आपकी राशि पर मंगल का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये आसान उपाय आपको राहत दे सकते हैं:
- हनुमान चालीसा का पाठ: प्रत्येक मंगलवार को नियम से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें।
- लाल वस्तुओं का दान: मंगल को शांत करने के लिए लाल कपड़ा, मसूर की दाल या तांबे के बर्तनों का दान करें।
- सेवा भाव: गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों की मदद करने से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं।
