ओपन जेलों पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को 10 दिनों में निगरानी कमेटी बनाने का आदेश

ओपन जेलों पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को 10 दिनों में निगरानी कमेटी बनाने का आदेश

Johar News Times
2 Min Read

रांची, झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य की ओपन जेलों (खुली जेलों) की निगरानी के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन नहीं किए जाने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि 10 दिनों के भीतर तीन सदस्यीय निगरानी समिति का गठन कर इसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।

सरकार की समय मांगने की दलील खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कमेटी गठन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा बताई गई वजहें अस्पष्ट और असंतोषजनक हैं। बेंच ने टिप्पणी की कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही समिति की संरचना तय कर चुका है, तो ड्राफ्ट तैयार करने के नाम पर देरी का कोई औचित्य नहीं है।

24 जून तक रिपोर्ट, 25 जून को अगली सुनवाई
अदालत ने राज्य सरकार को 24 जून तक कमेटी गठन की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य की सभी ओपन जेलों की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी।

तीन सदस्य होंगे कमेटी में
अदालत के निर्देशानुसार समिति में झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि, गृह सचिव या उनके द्वारा नामित अपर सचिव स्तर के अधिकारी तथा जेल विभाग के डीआईजी रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी को शामिल किया जाएगा।

कैदियों की सुविधाओं और पुनर्वास पर रहेगा फोकस
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की ओपन जेलों की व्यवस्था सुधारने के लिए राज्यों को ऐसी समितियां गठित करने का निर्देश दिया था। समिति का उद्देश्य कैदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, भोजन, जिम और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना तथा सजा पूरी होने के बाद उनके पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापन की योजना तैयार करना है। इसी आदेश के अनुपालन को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।

Share This Article